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पीएम मोदी, सोनिया गांधी, उद्धव ठाकरे समेत 10 हज़ार भारतीयों की जासूसी कर रही चीन की कंपनी

Bag news India

चीन की एक कम्पनी भारत के 10 हज़ार ज्यादा लोगों की जासूसी कर रही है. इन 10 हज़ार लोगों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, कांग्रेस प्रेसिडेंट, राज्यों के मुख्यमंत्री के अलावा और बहुत सारे नामचीन लोग शामिल हैं. ये ख़ुलासा इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की खोजी रपट में हुआ है.

किस कम्पनी का काम है?

झेंहुआ डाटा इन्फ़र्मेशन टेक्नॉलजी कॉर्पोरेशन लिमिटेड इस काम को अंजाम दे रही थी. एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘चीन राष्ट्र को नई मजबूती देने और ‘हाइब्रिड वॉरफ़ेयर’ के लिए इन ‘विदेशी टारगेट्स’ की सूची तैयार की गयी है. हाइब्रिड वॉरफ़ेयर यानी सूचनाओं के सहारे युद्ध लड़ना. बड़ी बात यह है कि बड़े पैमाने पर जासूसी कर रही इस झेंहुआ कंपनी में चीन सरकार की भी हिस्सेदारी है.

भारत के किन-किन लोगों का नाम है? 

जैसा हम बता चुके हैं, ये कंपनी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी और उनके परिवार के लोगों की जासूसी तो कर ही रही थी. इसके अलावा मुख्यमंत्रियों में ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, नवीन पटनायक, शिवराज सिंह चौहान पर भी नजर रख रही थी. केंद्रीय मंत्रियों में राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल इसके रडार पर थे. चीफ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ बिपिन सिंह रावत और उनके साथ-साथ आर्मी, नेवी और एयरफ़ोर्स के 15 पूर्व प्रमुख, मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, जज एएम खानविलकर, लोकपाल जज पीसी घोष, CAG जीसी मुर्मू की हर गतिविधि पर कंपनी नजर रख रही है. इनके अलावा पेमेंट ऐप Bharat Pe के संस्थापक निपुण मेहरा और ऑथेंटिकेशन टेक्नॉलजी फर्म ऑथब्रिज के संस्थापक अजय त्रेहान पर भी इसकी नजरें थीं. रतन टाटा और गौतम अडानी की भी चीन की ये कम्पनी जासूसी कर रही है.

गौर करने वाली बात ये भी है कि सिर्फ़ नेता ही नहीं बल्कि उनके पतियों या पत्नियों और घर के दूसरे सदस्यों की भी निगरानी की जा रही है. मसलन, नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन, मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर और उनकी बेटियां, गांधी परिवार में राहुल-प्रियंका के अलावा दिवंगत राजीव गांधी, स्मृति ईरानी के पति ज़ूबिन ईरानी, अखिलेश यादव, उनके पिता मुलायम, पत्नी डिम्पल, ससुर, चाचा शिवपाल और रामगोपाल केे भी नाम लिस्ट में हैं.

पूर्व मुख्यमंत्रियों में लालू यादव, रमन सिंह, अशोक चव्हाण, सिद्दारमैया समेत दिवंगत एम करुणानिधि और कांशीराम के बारे में भी जानकारियां जुटाई जा रही थीं.

अखबार का दावा है कि चीन की इस कंपनी ने अलग से 250 नौकरशाहों की लिस्ट तैयार कर रखी है. इसमें विदेश सचिव हर्ष वर्धन शृंगला, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत जैसे नाम भी हैं. खिलाड़ियों में सचिन तेंदुलकर, फ़िल्मकार श्याम बेनेगल, नृत्यांगना सोनल मानसिंह भी इसके रडार पर हैं.

इन सभी के अलावा बहुत सारे नौकरशाहों, जजों, वैज्ञानिकों, पत्रकारों, रिसर्चर्स, अभिनेताओं, खिलाड़ियों, धार्मिक नेताओं और एक्टिविस्टों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं. करप्शन, स्कैम, आतंकवाद, स्मगलिंग के आरोपियों पर भी नजर रखी जा रही थी.

कैसे की जा रही जासूसी?

अख़बार की मानें तो कम्पनी Overseas Key Information Database (OKIDB) बना रही थी. यानी बाहर के देशों की ज़रूरी जानकारियों का एक डाटाबेस. इस डाटाबेस में सैकड़ों की संख्या में सूचनाएं एकत्र की गयी हैं. इन सूचनाओं को एक ख़ास तरीक़े से टारगेट करने और क्लासिफ़ाई करने के काम में इस्तेमाल लाया जाता है.

सोशल मीडिया के डाटा, ऑनलाइन गतिविधियां, रिसर्च पेपर के आकड़े, लेख, न्यूज़, पेटेंट्स और कम्पनी में रिक्तियों की पोज़िशन से झेंहुआ कंपनी जानकारियां जुटाती रही है. ख़ास व्यक्तियों के नेटवर्क, उनके संस्थान और संगठनों पर फ़ोकस रखा जाता है.

और कौन से देश निशाने पर हैं?

भारत के अलावा अमरीका, यूके, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और अरब देशों के आंकड़े भी चीन द्वारा जुटाए जा रहे थे. साउथ-ईस्ट चीन के ग्वांडॉंग राज्य के शेंझेन शहर में कम्पनी के एक कर्मचारी ने ये जानकारी भारत समेत दुनिया के कुछ दूसरे अख़बारों को भी लीक की है. कर्मचारी ने ख़तरा भांपते हुए अपना नाम गुप्त रखा.

क्यों जुटायी जा रही हैं जानकारियां?

जैसा हमने पहले बताया, ‘हाइब्रिड वॉरफ़ेयर’ की नीयत से. मतलब ऐसा युद्ध, जिसमें सूचनाओं की मदद से किसी पर बढ़त हासिल की जाती है, या उसे हराया जाता है, या प्रभावित किया जाता है. और ये काम कैसे किए जाते हैं, सूचनाओं को प्रदूषित करके या ग़लत जानकारियां फैलाकर, या कोई सूचना लीक करके.

इस कम्पनी का स्ट्रक्चर कैसा है?

अख़बार के मुताबिक़, कम्पनी के मालिक हैं वांग जेफ़ेंग. उनकी कम्पनी में 86 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. वो पहले IBM के इंजीनियर रह चुके हैं. आर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स, डाटा जुटाने और देश के बाहर के सोशल मीडिया से डाटा इकट्ठा करके उन पर रिसर्च करने का दस वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं.

इसके अलावा कम्पनी के पार्ट्नर हैं :

– ताईजी कम्प्यूटर – इसमें चीन के ऐसेट्स सुपरविज़न और एडमिन कमीशन की 40 प्रतिशत हिस्सदारी है.

– सेथ बिग डाटा अकैडमी – ये चीन के IT और उद्योग मंत्रालय से जुड़ी हुई कम्पनी है.

– वेंग टेक – ये चीन के साइंस अकैडमी के मालिकाने के अधीन चलती है.

– इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी एंड इकोनमिक्स – ये चीन के राज्य परिषद के साथ जुड़ा हुआ है.

– हुआरोंग टेक्नॉलजी ग्रुप कॉर्परेशन लिमिटेड – ये एक राष्ट्रीय कम्पनी है.

– LSSEC टेक – ये चीन की मिलिट्री के लिए सूचना-सुरक्षा प्रॉडक्ट्स बनाने का काम करने वाले डिवेलपर हैं.

अख़बार का दावा है कि इस कम्पनी की वेबसाइट http://www.china-revival.com 9 सितम्बर को बंद कर दी गयी. ऐसा तब किया गया, जब अख़बार ने सवालों का जवाब पाने के लिए उससे संपर्क साधा. अब इस साइट पर जाने पर लिखा मिलता है 502 बैड गेटवे.

चीन का और कम्पनी का क्या कहना है?

अख़बार के मुताबिक़, झेंहुआ ने अख़बार के सवालों का जवाब नहीं दिया. अख़बार के पत्रकार ने झेंहुआ के शेंझेन स्थित हेडक्वॉर्टर में दस्तक दी. सवालों का जवाब तो नहीं दिया गया, लेकिन कम्पनी के कर्मचारी ने कहा,

“माफ़ करिएगा, आपके सवाल हमारे कामकाज की गुप्त जानकारियों से जुड़े हुए हैं. इनका जवाब देना मुनासिब नहीं होगा.”

वहीं दिल्ली में मौजूद चीनी दूतावास के सूत्र ने अख़बार से कहा,

“चीन कभी नहीं चाहता कि उसकी कंपनियां ख़ुफ़िया तरीक़े से या क़ानून का उल्लंघन करके जानकारियां जुटाएं. चीन की सरकार चीनी कम्पनियों से इस बात का आग्रह करती रहती है कि देश के बाहर व्यापार करते समय वो अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों का ज़रूर पालन करें. और सरकार की ये पोज़ीशन कभी नहीं बदलेगी.”

हालांकि दूतावास के सूत्र ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि झेंहुआ के जुटाए आंकड़ों का क्या सरकार इस्तेमाल कर रही है? और क्या चीन की मिलिट्री और सरकार झेंहुआ के साथ मिलकर काम करते रहे हैं?

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