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कोरोना वायरस को विराट सेेना का सलाम, RCB की जर्सी पर लिखा होगा नाम

बैग न्यूज इंडिया

विराट कोहली की अगुवाई में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग खेलेगी तो कोरोना नायकों के सम्मान में खिलाड़ियों की जर्सी के पीछे ‘माय कोविड हीरोज’ लिखा होगा। आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने यूएई में वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में इस जर्सी के लांच के मौके पर गुरूवार को कहा, ‘पहली बार एक टीम के रूप में हम इस तरह की शानदार मुहिम से जुड़े। यह उन कोरोना नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अपनी परवाह किए बिना निस्वार्थ भाव से दूसरों के बारे में सोचा’

उन्होंने कहा, ‘यह हमारी ओर से उनके लिए सलाम है। इस जर्सी को पहनना हमारे लिए फख्र की बात है। हम सोच भी नहीं सकते जिन चुनौतियों का उन्होंने सामना किया है। मैने अपनी हाउसिंग सोसायटी में रोजमर्रा के मूल काम करने वालों को पिछले छह सात महीने से कठिन हालात में भी अपना काम पूरी ईमानदारी से करते देखा है, जिससे मैने बहुत कुछ सीखा है। उनके पास विकल्प था लेकिन वे काम से भागे नहीं।’
 


आरसीबी के चेयरमैन संजीव चूड़ीवाला ने कहा, ‘खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में मैच और अभ्यास के दौरान इस जर्सी को पहनेंगे। पहले मैच में पहनी गई जर्सी नीलाम होगी और उससे होने वाली कमाई ‘गिव इंडिया फाउंडेशन’ को दी जाएगी। आरसीबी ने पिछले कुछ समय से अपने सोशल मीडिया हैंडल पर हैशटैग माय कोविड हीरोज और हैशटैग रीयल चैलेंजर्स मुहिम चलाई हुई है जिसमें कोरोना काल में समाज सेवा कर रहे नायकों की कहानियां दिखाई जा रही है। इनमें से तीन कोरोना नायक इस मौके पर मौजूद थे जिनमें चंडीगढ के सिमरनजीत सिंह शामिल हैं जो बधिक होने के बावजूद लोगों की मदद के लिए आगे आए, इनके अलावा अहमदाबाद की हेतिका शाह, जिन्होंने कोरोना योद्धाओं के लिए ‘फोर एस शील्ड’ डिजाइन की और कर्नाटक के जीशान जावेद, जिन्होंने ‘मिशन मिल्क’ के जरिए दिहाड़ी मजदूरों को लगातार दूध बांटा।

सलामी बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने अपने पिता के लिए नियुक्त घरेलू सहायक का उदाहरण देते हुए कहा, ‘हमारे घरेलू सहायक की पत्नी गर्भवती थी, लेकिन वह मेरे पिता को छोड़कर उससे मिलने नहीं गया। उसका बेटा हुआ और दो दिन बाद गुजर गया लेकिन स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के कारण वह नहीं गया। लोग भले ही खिलाड़ियों या क्रिकेटरों को रोलमॉडल कहें, लेकिन असली नायक तो ये लोग हैं। कोहली ने कहा, ‘इस तरह की चुनौतियों का सामना करना ही बहुत बड़ी बात है और वह भी प्रशंसा या प्रतिफल की कामना किए बिना। मैंने इस पूरे दौर में यही सीखा है कि जो है उसमें संतोष करना सीखें और जिंदगी में अनावश्यक भागते नहीं रहें।’

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