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किस बात पर पंजाब में सनी देओल के ‘सामाजिक बहिष्कार’ की बात हो रही है?

Bag news India

किसानों से जुड़े तीन विधेयकों का ज़बरदस्त विरोध हो रहा है. हालांकि बिल लोकसभा से पास हो चुके हैं. आज यानी 20 सितंबर को राज्यसभा में पेश किए गए, जिन पर बहस हो रही है. हरियाणा और पंजाब में !किसान इन विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान BJP के नेताओं का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं.

पंजाब में किसान गुरुदासपुर से सांसद सनी देओल का “सामाजिक बहिष्कार” करने की तैयारी कर रहे हैं. वजह- सांसद सनी देओल का किसान बिल को सपोर्ट करना. किसानों का कहना है कि वो सभी BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं का बहिष्कार करेंगे. इतना ही नहीं, बुधलाडा मंडी के कमीशन एजेंट ने तो घोषणा भी कर दी है कि वो किसी भी भाजपा नेता को मंडी में अंदर आने तक नहीं देंगे.

पंजाब में किसानों ने कहा कि सनी देओल BJP के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते. और एक किसान के बेटे होने के बावजूद उन्होंने पंजाब के लोगों के साथ धोखा किया. पंजाब के नेता सुखजिंदर सिंह ने सनी पर तंज कसते हुए कहा कि BJP सांसद ने अपने “ढाई किलो के हाथ” से किसानों को मार दिया.

सनी देओल ने 18 सितंबर को ट्वीट करके लिखा था-

फसल उत्पादन के दौरान फसल पर किसान का मालिकाना हक बना रहेगा एवं फसल का बीमा कराया जाएगा तथा आवश्यकता होने पर किसान वित्तीय संस्थानों से ऋण भी ले सकेंगे.

भारत सरकार ने इस बात को मान्यता दी है कि किसान बेहतर मूल्य पर अपने कृषि उत्पाद को अपनी पसंद के स्थान पर बेच सकता है जिससे संभावित खरीदारों की संख्या में बढ़ोतरी होगी.

BKU सचिव हरविंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि वो सनी देओल के स्टेटमेंट से दुखी हैं. उनका कहना है,

सनी भूल गए हैं कि उन्हें 2019 के आम चुनाव के दौरान पंजाब से कितना प्यार, सम्मान मिला था. उस क्षेत्र में BJP की लहर बहुत कम थी, पर फिर भी लोगों ने वोट किया. लगता है कि वो अपने वोटर्स को भूल गए हैं. वो किसानों के विरोध और दर्द की परवाह किए बिना BJP का राग अलाप रहे हैं. वो एक पंजाबी हैं और परिवार किसान से आते हैं, फिर भी किसान का दर्द समझ नहीं पा रहे हैं.

किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतमान पन्नू ने कहा कि अभिनेता जब पंजाब आए थे तो उन्हें राजनीति के बारे में कुछ नहीं पता था.

हम जानते थे कि वह कच्चे हैं. लेकिन उन्होंने बताया था कि वो एक पंजाबी के रूप में वोट मांग रहे. एक पंजाबी होने और एक किसान के बेटे के नाते लोगों ने उन्हें वोट दिया और जिताया भी. लेकिन उसने हमारे लिए क्या किया है? वह RSS और BJP की भाषा बोलते हैं और वो लाखों छोटे और सीमांत किसानों के बारे में परेशान नहीं हैं. हम उन्हें हमारे गांवों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे.

कौन-से तीन विधेयकों का विरोध हो रहा है

मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया है. इसके जरिए खाद्य पदार्थों की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है. यानी व्यापारी कितना भी अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल वगैरह जमा कर सकते हैं.
कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 है. इसका उद्देश्य कृषि उत्पाद विपणन समितियों यानी एपीएमसी मंडियों के बाहर भी कृषि से जुड़े उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है. यानी मोदी सरकार ने वो व्यवस्था खत्म कर दी है, जिसमें किसान अपनी उपज APMC मंडियों में लाइसेंसधारी खरीदारों को ही बेच सकते थे
मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक, 2020, जो कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता प्रदान करता है, ताकि बड़े बिजनेस वाले और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर जमीन लेकर खेती कर सकें.

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