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भारत-चीन के बीच अब जो बातचीत हुई, उसे देखकर लग रहा है कि शायद कुछ अच्छा हो

Bag news India

भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर दोनों देशों के बीच कोर कमांडर लेवल की छठे दौर की बातचीत हुई. 21 सितंबर को. 14 घंटे तक चली. इसके बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी किया. इसमें एक बड़ी सहमति बनी. तय हुआ कि दोनों देश LAC यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अब और सैनिक नहीं भेजेंगे. जमीनी हालात को एकतरफा तौर पर बदलने से बचेंगे. और भी कई मसलों पर सहमति बनी.

इस जॉइंट स्टेटमेंट में लिखा है-

“21 सितंबर को भारत और चीन के सीनियर कमांडर्स ने छठे दौर की सैन्य कमांडर लेवल की मीटिंग की. LAC पर हालात को स्थिर बनाने के लिए दोनों तरफ से गहन और स्पष्ट विचारों का आदान-प्रदान हुआ. तय हुआ कि दोनों देशों के नेताओं के बीच जो महत्वपूर्ण सहमति बनी है, उसे ईमानदारी से लागू किया जाएगा. ग्राउंड लेवल पर कम्युनिकेशन को मजबूत किया जाएगा. गलतफहमियों और गलत फैसले लेने से बचेंगे. फ्रंटलाइन (मोर्चे) पर और सैनिक भेजने पर रोक लगाई जाएगी. मौजूदा ज़मीनी हालात में एकतरफा बदलाव नहीं होगा. ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे स्थिति और जटिल हो जाए.”


स्टेटमेंट में ये भी कहा गया है कि ज़मीनी स्तर पर समस्या को हल करने के लिए व्यावहारिक उपाय किए जाएं. साथ मिलकर बॉर्डर पर शांति बनाए रखी जाए. दोनों पक्ष जल्द ही सातवें दौर की बातचीत करने पर भी सहमत हुए.

इंडिया टुडे के सीनियर एडिटर शिव अरूर ने लिखा कि इस वार्ता की बड़ी बात यही है कि दोनों पक्षों ने सीमा पर और फौज न भेजने पर सहमति जताई है. हालात की गंभीरता को स्वीकार करते हुए तनाव को बढ़ने से रोकने की बात कही है. हालांकि इसका यह मतलब निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि अब बॉर्डर पर टकराव नहीं होगा क्योंकि दोनों देशों के सैनिक भारी संख्या में हथियारों के साथ पहले से तैनात हैं.


भारत और चीन के बीच लद्दाख के LAC वाले इलाकों में कई महीनों से तनाव बना हुआ है. शुरुआती बैठकों में कुछ सफलता हासिल होती दिखी थी लेकिन चौथे और पांचवे दौर की बातचीत कमोबेश बेनतीजा रही. गलवान घाटी को छोड़कर चीन कहीं पूरी तरह पीछे नहीं हटा. अगस्त के आखिर में भारत की सेना ने पैंगोंग सो के दक्षिणी किनारे पर सामरिक महत्व की चोटियों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया. तब से चीन दक्षिणी किनारे पर विवाद को प्राथमिकता से सुलझाना चाहता है. लेकिन भारत की कोशिश है कि LAC पर जहां-जहां तनाव है, उन सब जगहों की बात हो, जैसे गोगरा पोस्ट, हॉट स्प्रिंग्स, और सबसे प्रमुख पैंगोंग त्सो (उत्तरी और दक्षिणी किनारा). छठे दौर की बातचीत के बाद आए स्टेटमेंट से लग रहा है कि इसका सकारात्मक असर आगे देखने को मिल सकता है.

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