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Love Marriage के 14 साल बाद पत्नी दूसरे प्रेमी के पास गई, दुकानदार पति ने लगाया फंदा

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लव मैरिज के 14 साल बाद पत्नी दूसरे प्रेमी के पास चली गई ताे काला आम्ब की शिव कॉलोनी में रहने वाले उसके पति संजीव कुमार ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने सुसाइड नाेट बरामद किया है। नारायणगढ़ थाना पुलिस ने संजीव के पिता रणधीर सिंह की शिकायत पर संजीव की पत्नी रजनी उर्फ सबाना और राजमिस्त्री सतप्रकाश उर्फ बबला पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

रणधीर सिंह ने पुलिस को बताया कि काला आम्ब में उसका बीड़ी-सिगरेट का खोखा है। छोटे बेटे संजीव ने करीब 14 साल पहले हिमाचल प्रदेश के नाहन निवासी रजनी उर्फ सबाना के साथ प्रेम विवाह किया था। संजीव काला आम्ब में करियाने की दुकान करता था। शादी के बाद संजीव की 12 साल की बेटी खुशी और 11 साल का बेटा वंश है। रणधीर के अनुसार संजीव का रजनी के साथ राजमिस्त्री का काम करने वाले गांव खारी निवासी सतप्रकाश उर्फ बबला की वजह से झगड़ा रहता था।

रजनी राजमिस्त्री से फोन पर काफी देर तक बातें करती थी। आराेप है कि रजनी के राजमिस्त्री के साथ नाजायज संबंध थे। संजीव के साथ झगड़ा करने के बाद रजनी राजमिस्त्री के साथ ही कई-कई दिन तक रहती थी। कई बार पंचायती तौर पर रजनी व राजमिस्त्री बबला को काफी समझाया भी गया। करीब 6 दिन पहले भी संजीव और रजनी में झगड़ा हुआ और रजनी सतप्रकाश राजमिस्त्री के पास चली गई थी। यह बात संजीव ने उसे बताई।

इसी वजह से संजीव परेशान रहने लगा। बुधवार सुबह 9 बजे संजीव उसके खोखे पर चाय व नाश्ता लेकर आया और दुकान पर चला गया। करीब 11 बजे पता चला कि संजीव ने घर में पंखे में फंदा लगा लिया है। सूचना पुलिस काे दी और कमरे की कुंडी तोड़ कर चेक किया तो संजीव की नब्ज चल रही थी। इसलिए वह अपने साले समे सिंह के साथ संजीव को नारायणगढ़ सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

‘मेरे बेटे और बेटी की जिम्मेदारी मेरे मामा समे सिंह की’
मेरे मरने के बाद मेरा मकान बेटे वंश के नाम होना चाहिए। मेरे सुसाइड का कारण बबला मिस्त्री सतप्रकाश है, पिरथी का लड़का (बबला) और मेरी घर वाली रजनी जिसका नाम सबाना है। मेरे बेटे और बेटी की जिम्मेदारी मेरे मामा समे सिंह की है और मेरे पिता रणधीर सिंह की इसमें कोई गलती नहीं है। बबले ने घर खत्म कर दिया है। धन्यवाद मेरे बेटे वंश और बेटी खुशी मुझे माफ कर देना, मैं ओर ज्यादा जी नहीं सकता।

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