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बेटी दिवस मनाना क्यों है जरूरी ? डॉटर्स डे को अपनी बेटी के लिए इस तरह बना सकते हैं खास

बैग न्यूज

डॉटर्स डे (Daughters Day) सभी पैरेंट्स के लिए बेहद खास होता है. इस दिन को वे अपनी बेटी के लिए बहुत खास तरीके से सेलिब्रेट करना चाहते हैं. इस दिन पैरेंट्स अपनी बेटी को यह एहसास दिलाते हैं कि वह उनके लिए कितनी स्पेशल है. डॉटर्स डे (Daughters Day) पर बेटी को खास होने का एहसास कराने के लिए पैरेंट्स पूरा दिन कुछ न कुछ स्पेशल करते है बच्चियों के लिए समर्पित है बेटी दिवस. इस बार डॉटर्स डे भारत में 27 सितंबर को मनाया जा रहा है. हर साल इसे सितंबर माह के चौथे रविवार को मनाने की परंपरा है. इंटरनेशनल डॉटर्स डे (World Daughters Day) 28 सितंबर को मनाया जा रहा है.

पापा की लाडली

क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे ?

एक लड़की के जन्म को कलंक के जोड़ने की परंपरा थी. पहले के जमाने में लड़के होने पर खुशियां और लड़की होने पर मातम जैसा माहौल बना दिया जाता था. हालांकि, देश के कई हिस्सों में आज भी बेटियों को कलंक मान कर उनकी अनदेखी की जाती है और सही से पालन पोषण नहीं किया जाता है. इसी विचारधारा को मिटाने के लिए बेटी दिवस (डॉटर्स डे) मनाने की परंपरा शुरू की गयी. ताकि, लड़कियों के साथ हो रहे इस भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़े और लिंग के बीच समानता को बढ़ावा मिले.

कैसे मनाएं बेटी दिवस ?

इस दिन, माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्य अपनी प्यारी बेटियों को उपहार दे सकते हैं,

उनके लिए या उनके पसंद का घर में विशेष व्यंजन बना कर साथ में खाएं,

इस दिन बेटियों के लिए समय जरूर निकाले, उनके साथ अपना गुणवत्ता समय बिताएं और उन्हें स्पेशल फील करवाएं,

उन्हें एहसास करवाएं कि आप बेटे तथा बेटियों को कैसे समान रूप से प्यार और सम्मान करते हैं,

साथ ही साथ उनकी इच्छाओं पर अंकुश न लगाएं. इसके बजाय, उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करें और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रेरित करें.

भारत में क्यों मनाया जाता है बेटी दिवस ?

भारत में बेटी दिवस मनाने की खास वजह है. दरअसल, इस दिवस के माध्यम से बेटियों के प्रति लोगों की सोच को बदलना और समाज में फैली उनके प्रति कुरूतियों को समाप्त करके उन्हें समान अधिकार दिलाना ही इसका उद्देश्य है.

  • उन्हें जन्म से पहले मारना,
  • घरेलू हिंसा, दहेज व दुष्कर्म से उन्हें बचाने के लिए देशवासियों को जागरूक करना.
  • बेटियां बोझ नहीं बल्कि बेटों की तरह जीवन का अहम हिस्सा होती हैं. ये सभी बातों से लोगों को अवगत करवाना इस दिवस का उद्देश्य है. कया खोब कहा हैं कि…………………

ख्वाबों के पंख के सहारे ,उड़ने को तैयार हूं, मैं हूं एक बेटी,आसमान की बुलंदियों को छूने के लिए तैयार हूं.

तू ही सजदा मेरा तू ही बंदगी है, तू ही मेरा फूल और तू ही कली है.

तेरी मुस्कान मेरे लिए सब कुछ है बेटी मेरी ,और तेरी हंसी पर कुर्बान मेरी कई ज़िन्दगी है.

बेटियां बोझ नहीं बल्कि बेटों की तरह जीवन का अहम हिस्सा होती हैं.
इस लिए उनकी इच्छाओं पर अंकुश न लगाएं. इसके बजाय, उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करें और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रेरित करें.

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