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राजस्थान: पिछले चार दिन से हिंसा जारी, पुलिस फायरिंग में लड़के की मौत, पांच घायल

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राजस्थान का डूंगरपुर. यहां पिछले 17 दिनों से शिक्षक भर्ती के अनारक्षित 1167 पदों को एसटी वर्ग के उम्मीदवारों से भरने की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहा था. गुरुवार, 24 सितंबर को ये प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया. चार दिन बाद रविवार, 27 सितंबर को भी हिंसा नहीं थमी है. खेरवाड़ा इलाके तक फैली हिंसा में उपद्रवियों ने कई होटलों और मकान में आग लगा दी. डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और उदयपुर में धारा 144 लगाते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. पूरे उदयपुर संभाग में आज होने वाले पंचायत चुनाव भी रद्द कर दिए गए हैं.

24 सितंबर से उग्र हुई हिंसा अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही है. उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे ब्लॉक है और आने-जाने वालों पर उपद्रवियों ने पथराव किया.

3300 लोगों के ख़िलाफ़ FIR

प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे अभी भी ब्लॉक कर रखा है. हाईवे पर आने-जाने वाले लोगों पर पथराव भी किया गया. पुलिस ने तोड़फोड़, हाईवे बाधित करने, आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे 16 केस में कुल 3300 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. 34 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

एक व्यक्ति की मौत, 5 घायल

रिपोर्ट के मुताबिक, 27 सिंतबर को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें 17 साल के तरुण अहारी की मौत हो गई और पांच व्यक्ति घायल हो गए. बताया जा रहा है कि आंदोलनकारियों ने 20 किलोमीटर से ज़्यादा का इलाका कब्जे में ले लिया है. यहां लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ की ख़बरें लगातार आ रही हैं. उदयपुर अहमदाबाद हाईवे बंद है.

बाहरी तत्वों की वजह से बातचीत नहीं हो पा रही: प्रशासन

प्रशासन का दावा है कि भीड़ में कुछ बाहरी लोग घुस आए हैं जो बातचीत नहीं होने दे रहे हैं, जिससे हिंसा हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला है कि कुछ लोग झारखंड और छत्तीसगढ़ से आए हैं क्योंकि उनकी भाषा यहां की स्थानीय भाषा नहीं है. इससे पहले कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई है.

तीन दिन से जारी हिंसा के चलते राजस्थान के कई इलाकों में धारा 144 लागू है.

संवाद के लिए आगे आएं युवा: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हालात की समीक्षा के लिए शनिवार, 26 सितंबर को कई मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है और कानून-सम्मत न्यायोचित मांग पर विचार करने और संवाद करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि नौजवान हिंसा छोड़ें और सरकार के सामने बात रखने के लिए आगे आएं.

क्या विवाद है

प्रदर्शन करने वाले शिक्षक भर्ती के अनारक्षित 1167 पदों को एसटी वर्ग से भरने की मांग कर रहे हैं. 12 अप्रैल 2018 को तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सामान्य शिक्षा के 5431 पदों पर भर्ती निकली थी. एसटी को 45 फीसदी, एससी को 5 फीसदी और सामान्य वर्ग को 50 फीसदी आरक्षण है. इस तरह सामान्य वर्ग के लिए 2721 पद थे. राजस्थान पात्रता परीक्षा REET में 60 फीसदी से ज्यादा अंक वाले सामान्य वर्ग के 965 उम्मीदवार चयनित हुए. इन्हीं पदों पर REET में 60 फीसदी से ज्यादा अंक वाले एसटी के 589 उम्मीदवारों का चयन हुआ. इस तरह सामान्य वर्ग से कुल 1554 पद भरे और 1167 पद खाली रह गए. प्रदर्शनकारी इन्हीं खाली पदों पर एसटी अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं. हालांकि हाईकोर्ट भी इस बात से इनकार कर चुका है. अपनी मांगों को लेकर कुछ लोग सात सितंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. ये प्रदर्शन 24 सितंबर को हिंसक हो गया.

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