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हाथरस कांड: DM की धमकी-मीडिया पर पाबंदी, क्या छुपा रहा प्रशासन? सवाल खड़े करती हैं ये तस्वीरें

बैग न्यूज –

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ गैंगरेप और फिर मौत की वारदात से पूरे देश में गुस्सा है. पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन गैंगरेप की बात को गलत करार दिया है. अब देश में दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग हो रही है, लेकिन इस बीच स्थानीय प्रशासन की ओर से कई तरह की सख्ती बरती जा रही है. गांव में मीडिया की एंट्री पर रोक लगा दी गई, किसी नेता को जाने नहीं दिया जा रहा है, खुद डीएम जाकर परिवार से धमकी भरे अंदाज में बात कर रहे हैं. 

जब ये सभी कड़ियां मिलती हैं तो प्रशासन के रवैये और उनके मकसद पर सवाल खड़े होते हैं. क्योंकि प्रशासन सच बाहर आने से बचना चाहता है, इसी वजह से किसी की एंट्री पर रोक लगा दी है. आखिर वो कौन-सी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े होते हैं. 

1.    हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार का एक वीडिया सामने आया, जिसमें वो पीड़िता के परिवार से बात कर रहे हैं. यहां डीएम परिवार से कह रहे हैं मीडिया आज है, कल चला जाएगा. आपको हमारे साथ रहना है, ऐसे में मदद स्वीकार कर लीजिए. साफ तौर पर डीएम परिवार को धमकाकर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं. 

2.    हाथरस के ही एडीएम जेपी सिंह और वकील सीमा कुशवाहा का एक वीडियो सामने आया. जहां सीमा कुशवाहा पीड़िता के परिवार से मिलने जाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन एसडीएम उन्हें आगे नहीं जाने दे रहे हैं. बता दें कि सीमा कुशवाहा ने ही दिल्ली की निर्भया का केस लड़ा था और उन्होंने हाथरस की निर्भया के परिवार को मदद की बात कही है. 

3.    मंगलवार की रात को जब पीड़िता का शव हाथरस के गांव पहुंचा तो आधी रात को ही उसे जला दिया गया. इंडिया टुडे की रिपोर्टर तनुश्री पांडे इस दौरान वहां पर ही रहीं, लेकिन जब तनुश्री ने सवाल किया तो पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया. और तुरंत ही डेडबॉडी को जला दिया. 


4.    हाथरस जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं, साथ ही धारा 144 लगाई गई है. इसके अलावा प्रशासन ने मीडिया को गांव के अंदर जाने से रोक दिया है. शुक्रवार को हाथरस में पीड़िता के गांव में ग्राउंड रिपोर्ट के लिए मौजूद आजतक संवाददाता चित्रा त्रिपाठी के साथ कुछ अधिकारियों ने बदसलूकी की है. हाथरस में एक बड़े सरकारी अधिकारी ने आजतक संवाददाता को धमाकाया और बदसलूकी की है. 

5.    मीडिया के अलावा विपक्ष के नेताओं को भी जिले में नहीं जाने दिया जा रहा है. गुरुवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को नोएडा में ही रोक लिया गया, शुक्रवार को टीएमसी और सपा के सांसद जिले की सीमा तक पहुंचे तो आगे नहीं जाने दिया गया.

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