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जिस रिपोर्ट के बूते UP पुलिस ने हाथरस में रेप को नकारा, उसे AMU के डॉक्टर ने खारिज कर दिया

Bag news –

हाथरस मामले में यूपी पुलिस के ADG (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने बताया था कि FSL (फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट से रेप की पुष्टि नहीं हुई. अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज के CMO (चीफ मेडिकल ऑफिसर) अज़ीम मलिक ने इस FSL रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि घटना से 11 दिन बाद लिए गए सैम्पल से ये कंफर्म ही नहीं हो सकता है कि विक्टिम के साथ रेप हुआ है या नहीं. ऐसे में हाथरस विक्टिम के साथ नहीं होने का दावा नहीं किया जा सकता है.

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द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान CMO ने बताया पीड़िता को दो सप्ताह के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) में एडमिट किया गया था. कथित रेप के 11 दिन बाद उसके सैम्पल लिए गए. जबकि सरकार के दिशानिर्देश में सख्ती से बोला गया है कि घटना के बाद 96 घंटे में ही फॉरेंसिंक साक्ष्य मिल सकते हैं. उनका कहना है कि 11 दिन बाद लिए गए सैम्पल से अब FSL की वो रिपोर्ट रेप की पुष्टि नहीं कर सकती.

ADG प्रशांत कुमार ने कहा कि इस रिपोर्ट के अनुसार, विक्टिम के शरीर में वीर्य (सीमेन) की कोई उपस्थिति नहीं पाई गई. यानी विक्टिम के साथ रेप नहीं किया गया. उन्होंने ये भी कहा था कि जिन लोगों ने जाति के आधार पर लोगों के बीच वैमनस्य फैलाने की कोशिश में गलत जानकारी फैलाई है, उन पर एक्शन लिया जाएगा.

मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हमज़ा मलिक ने FSL रिपोर्ट को “अविश्वसनीय” बताया. उन्होंने कहा-

FSL टीम को घटना के 11 दिन बाद कोई साक्ष्य कैसे मिलेंगे? स्पर्म 2-3 दिन से ज्यादा सर्वाईव नहीं करते. टीम ने बाल, कपड़े, नाखून और वजाइना के सैम्पल लिए. पर उन 11 दिनों में पीरियड्स और दैनिक क्रियाओं की वजह से सैम्पल में सीमेन मौजूद ही नहीं था.

22 सितंबर को डॉक्टर ने पीड़िता की मेडिको-लीगल जांच भी की थी. और उसमें अपनी “अंतिम राय” दी थी. उनका कहना था कि उनके लोकल एग्ज़ामिनशेन के आधार पर शरीर पर फोर्स के साइन मिले हैं. पर उन्होंने पेनिट्रेशन इंटरकोर्स पर कहा था कि इसकी रिपोर्ट FSL में पेंडिंग है.

उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कहा गया था पीड़िता की रीढ़ की हड्डी पर चोट के निशान थे. इसके साथ उसके प्राइवेट पार्ट को नुकसान पहुंचाया गया था. पर रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं की गई थी.

बता दें कि 14 सितंबर को कथित तौर पर चार लड़कों ने दलित लड़की पर उसके खेत में हमला किया था. विक्टिम को इलाज के लिए JNMC में भर्ती किया गया. और जब 22 सितंबर को होश आया, तो उसने कथित यौन शोषण की जानकारी दी थी. फिर उसका मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज किया गया था. और पुलिस ने रेप की तमाम धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी. साथ ही पुलिस ने उसके बयान के आधार पर उसका सैम्पल फॉरेंसिंक साइंस लैब में भेजा. और घटना के 11 दिन बाद यानी 25 सितंबर को उसके सैम्पल लिए गए.

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