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हरियाणा: नमी में 2 प्रतिशत की छूट देगी सरकार, मगर 2 किलो अतिरिक्त लेगी धान

Bag news –

हरियाणा की मंडियों में नमी वाले धान को लेकर चल रही समस्या के बीच प्रदेश सरकार ने फिलहाल किसानों के लिए एक हल निकाला है। इसके तहत
प्रदेश सरकार धान में निर्धारित नमी की मात्रा में दो प्रतिशत तक छूट देगी। मगर इसके बदले में किसानों से दो किलो धान अतिरिक्त लिया जाएगा। इस संदर्भ में प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के संबंधित अफसरों को निर्देश दिए हैं।

अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों में धान समेत अन्य अनाज की खरीद शुरू हो चुकी है। मगर फिलहाल दिक्कत धान खरीद में आ रही है। किसान अपना धान लेकर मंडियों में पहुंच रहा है। मगर अधिकतर धान नमीयुक्त है। जिस वजह से मंडियों में धान की खरीद सुचारु रूप से रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
किसानों ने धान मंडियों के भीतर व बाहर सड़कों पर ही सुखाने को फैला दिया है। जिस वजह से खुद किसान भी परेशान हैं और आने वाले दूसरे किसानों को भी अपनी सूखी फसल मंडियों में डालने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रहे है। दूसरी ओर, प्रदेश के किसान और राइस मिलर भी लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि सरकार धान में निर्धारित नमी की मात्रा में छूट दे। ताकि धान की खरीद में देरी न हो और खरीद प्रक्रिया भी तेज हो। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने उक्त हल निकाला है।

102 किलो धान दो, 19 प्रतिशत नमी वाला धान खरीदेगी सरकार
सरकार ने धान खरीद को रफ्तार देने के लिए जो हल निकाला है, उसके तहत सरकार ने एक शर्त भी लगाई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने बताया कि सरकार द्वारा धान खरीद के दौरान नमी की जो निर्धारित मात्रा है, वो 17 प्रतिशत है। जिस किसान की धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत होगी। उसका धान एक ही दिन में बिकेगा और उसी दिन किसान घर भी जाएगा।


मगर फिलहाल सरकार ने नमी की इस मात्रा में दो प्रतिशत तक सशर्त छूट देने का फैसला लिया है। यानी अब शर्त के साथ 19 प्रतिशत तक नमी वाला धान भी लिया जा सकेगा। शर्त के अनुसार यदि किसी किसान की धान में 18 प्रतिशत नमी पाई गई तो उसे 100 किलो धान के ऊपर 1 किलो और यदि नमी 19 प्रतिशत पाई गई तो 100 किलो के ऊपर 2 किलो अतिरिक्त धान देना होगा। ताकि धान की पैक बोरी में नमी सूखने के बाद एक क्विंटल बोरी का भार एक क्विंटल से कम हो जाता है, तो अपने आप अतिरिक्त धान से रिकवर हो जाएगा। इससे न सरकार को नुकसान होगा और न ही राइस मिलरों को। बेहतर होगा कि किसान अपना धान पहले से ही सुखाकर लाएं और एक दिन में अपनी फसल बेचकर घर जाएं।

आढ़ती के माध्यम से चाहिए भुगतान तो पोर्टल पर भरना होगा विकल्प
हरियाणा सरकार ने इस बार किसानों को दो विकल्प दिए हैं। फसल का भुगतान कैसे चाहिए ये इच्छा प्रदेश सरकार ने किसान पर ही छोड़ दी है। किसान को यदि अपने फसल का भुगतान आढ़ती के माध्यम से ही चाहिए तो वे इसकी जानकारी मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर भर दें। पोर्टल लगातार खुला रहेगा। जो किसान पोर्टल पर इस बाबत जानकारी भरेगा उसी का भुगतान आढ़ती के माध्यम से आएगा। अन्यथा किसान की फसल का भुगतान सीधे उसके खाते में होगा। सभी किसानों का बैंक खाता नंबर सरकार के पास उपलब्ध है।

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