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खुद 44 अपराधों में आरोपी बीजेपी नेता ने हाथरस विक्टिम को ही दोषी बता दिया

Bag news –

हाथरस कथित गैंगरेप और मर्डर केस. देशभर में विक्टिम के लिए इंसाफ की मांग हो रही है. लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच बीजेपी के एक नेता का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो हाथरस विक्टिम को लेकर बेहद घटिया बातें कह रहे हैं. नेता का नाम रंजीत बहादुर श्रीवास्तव है. 44 आपराधिक मामले इनके खिलाफ दर्ज हैं. इनका मानना है कि गैंगरेप के चारों आरोपी निर्दोष हैं, मासूम हैं. आवारा तो वो लड़की थी जो मर गई.

नेता जी का बयान हम शब्दशः यहां लिख रहे हैं. उन्होंने कहा,

‘लड़की ने लड़के को बुलाया होगा बाजरे के खेत में. चूंकि प्रेम प्रसंग था. सब बातें सोशल मीडिया पर है, चैनलों में भी आ चुकी हैं. पकड़ ली गई होगी. अक्सर यही होता है खेतों में. ये जितनी लड़कियां इस तरह की मरती हैं, ये कुछ ही जगहों पे पाई जाती हैं. ये गन्ने के खेत में पाई जाती हैं, अरहर के खेत में पाई जाती हैं, मक्के के खेत में पाई जाती हैं, बाजरे के खेत में पाई जाती हैं, ये नाले में पाई जाती हैं, ये झाड़ियों में पाई जाती हैं, जंगल में पाई जाती हैं. ये धान के खेत में मरी क्यों नहीं मिलती हैं? ये गेहूं के खेत में मरी क्यों नहीं मिलती हैं? इनके मरने की जगह वही है. और कहीं पर घसीटकर नहीं ले जाई जाती हैं. कोई इनको घसीटकर ले जाते देखता नहीं है कि इनको घसीटकर ले जाया गया. आखिर ये घटनाएं इन्हीं जगहों पर क्यों होती हैं. ये पूरे देश स्तर पर जांत का विषय है, मैंने गलत नहीं कहा है. लेकिन लड़की दोषी नहीं है, लड़के दोषी हो गए.’

ये नेता यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि गैंगरेप के आरोपी लड़के निर्दोष हैं. उन्हें समय पर रिलीज़ नहीं किया गया तो उनका मानसिक शोषण होता रहेगा. उनकी खोई जवानी कौन लौटाएगा? क्या सरकार उनको मुआवजा देगी?

बीजेपी नेता के इस बयान पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, “वो इस लायक नहीं हैं कि उन्हें किसी पार्टी का नेता कहा जाए. वो अपनी बीमार मानसिकता का प्रदर्शन कर रहे हैं. मैं उन्हें नोटिस भेजूंगी.”

इससे पहले बलिया से बीजेपी सांसद सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लड़कियों में संस्कार डालने ज़रूरी हैं.

19 साल की एक लड़की का कथित तौर पर गैंगरेप हुआ. मौत से कुछ दिन पहले बयान दिया कि वो खेत में काम करने गई थी, इस दौरान गांव के चार लड़कों ने उसका गैंगरेप किया. गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की. आरोपियों के नाम भी उसने खुद बताए. घटना के 8-9 दिन बाद विक्टिम ने गैंगरेप की बात कही थी. तब ही उसके फॉरेंसिक सैम्पल लिए गए. ऐसे में तकनीकी कारणों के चलते इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है कि विक्टिम के साथ रेप हुआ था या नहीं. ज़ाहिर है, रिपोर्ट्स में रेप की पुष्टि नहीं हुई. इसी के आधार पर यूपी सरकार दावा कर रही है कि लड़की के साथ रेप नहीं हुआ.

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार के वकील इस मामले में संवेदनशीलता बरतने की दुहाई दे रहे हैं. दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी के नेता अपनी घटिया और गिरी हुई मानसिकता के जरिए रेप विक्टिम का चरित्र हनन कर रहे हैं. आरोपियों को निर्दोष बता रहे हैं, उनके लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं. जो लड़की मर गई, उसी पर सारा दोष मढ़ रहे हैं.

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