Chandigarh

विपक्ष की मांग-7 दिन का बुलाएं सत्र, उससे भी पहले सभी दलों, किसानों से मीटिंग करे सरकार

बैग न्यूज़ – चंडीगढ़

केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर बुलाए जा रहे पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र काे लेकर सूबे के विपक्षी दलों ने ऐतराज करना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि सत्र काे ज्यादा दिनों तक का रखा जाए। ताकि दूसरे दलों के विधायक भी अपनी बात को सदन में रख सकें। लेकिन सरकार द्वारा एक दिन का सत्र बुलाने के दौरान सभी विधायक कैसे अपनी बात को सदन में रख सकेंगे। सरकार द्वारा सत्र बुलाए जाने की घोषणा किए जाने के बाद से ही इस बात को लेकर सूबे की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। विपक्षी दलों के नेता सरकार को इस मुद्दे को लेकर घेरने लगे हैं। हालांकि सूबे के सभी दलाें के द्वारा इन कानूनों को लेकर धरने एवं प्रदर्शन कर अपना रोष जताया जा रहा है।

लेकिन इसके बाद भी विपक्षी दल सरकार पर विधानसभा सत्र को कम से कम 7 दिनों का बुलाए जाने को लेकर अपना दबाव बना रहे हैं। हालांकि सरकार भी अपनी तरफ से तैयारी कर रही है कि कृषि कानूनों को हर कीमत पर पंजाब में न लागू होने दिया जाए। इसके लिए वह विशेष सत्र के दौरान बिल लाने पर भी विचार कर रही है। सरकार ये भी जानती है कि अगर बिल लाया गया तो विपक्ष उसका विरोध नहीं कर पाएगा क्योंकि पंजाब की हर पार्टी इस समय किसानों के साथ खड़ी दिखना चाहती है। इस तरह अगर बिल लाया गया तो सरकार को इसे पास कराने में किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खेती के काले कानूनों के विरोध में धरना दिया
चंडीगढ़ | 
दिल्ली में यूथ अकाली दल (वाईएडी) के कार्यकर्ताओं ने किसान भवन के सामने जबरन थोपे जा रहे खेती कानूनों के विरोध में धरना दिया। उन्हें गिरफ्तार कर मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन लेकर जाया गया।

अगर सेशन नहीं बढ़ाया तो स्पीकर से करेंगे मांग : आप

आप नेता हरपाल चीमा ने कहा कि सेशन से पहले सभी किसान जत्थेबंदियों और सभी पार्टियों काे बुलाकर सांझा रणनीति तैयार की जाए। विधानसभा का सेशन कम से कम 7 दिनों का बुलाया जाना चाहिए। अगर सरकार 7 दिनों का सेशन नहीं बुलाती है तो विधानसभा स्पीकर से सेशन को बढ़ाने की मांग करेंगे।

एक दिन का सेशन बुलाना खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं : शिअद

शिअद के नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सरकार एक दिन का सेशन बुलाकर केवल खानापूर्ति कर रही है। सेशन का समय बढ़ाया जाना चाहिए। जिससे हर विधायक अपनी बात को रख सके। एक दिन में सभी विधायक कैसे अपने हल्कों और किसानों को लेकर बात रख सकते हैं।

सत्र के दौरान सरकार कानूनों को रद्द करने को ला सकती है बिल

चंडीगढ़ | कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों ने तो केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल ही रखा है, अब पंजाब सरकार भी केंद्र के इन कृषि कानूनों को लेकर सूबे में निष्क्रिय करने के काम में जुट गई है। अब सूबा सरकार केंद्र के इन कृषि कानूनों को निष्क्रिय करने को लेकर विधानसभा में एक मजबूत बिल लाने की तैयारी कर रही है। जिसमें केंद्र के कृषि कानूनों को सूबे में लागू करने से रोकने में मदद तो मिलेगी। क्योंकि सरकार को यह बात अच्छी तरह से पता है कि कृषि बिलों को लेकर विपक्षी दल भी सरकार के बिल का समर्थन करेंगे। ऐसे में सर्व सम्मति से विधानसभा में यह बिल पेश करने के बाद पास हो जाएगा।

बिल को बनाने से पहले कानूनी जानकारों की ली गई है राय

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने इस बिल को बनाने के लिए कानूनी जानकारों की राय ली है। इसमें अटार्नी जनरल अतुल नंदा की अध्यक्षता में एक पैनल ने केंद्र के इन कानूनों का अध्ययन किया है। इसमें पूरे एक पैनल की राय ली गई है कि सूबा सरकार किस तरह से केंद्र के इन कृषि कानूनों को पंजाब में निष्क्रिय करने को लेकर काम कर सकती है। बिल बनने के बाद इसे कानूनी रूप दे दिया जाएगा और इसके बाद सूबा सरकार का यह बिल कानून बन जाएगा। सरकार चाहती है कि अगर बिल लाया जाए तो उसको कोर्ट में चैलेंज न किया जा सके।

बिल को तैयार करने के काम में लाई गई तेजी

सरकार द्वारा विधानसभा सत्र में पेश किए जाने वाले बिल को तैयार करने के काम में तेजी लाई गई है। बिल को तैयार करने के दौरान कानून के माहिरों की राय को भी ध्यान में रखा जाएगा। जिसमें केंद्र के कृषि कानूनों की सारी पेचीदगियों को को ध्यान में रखा गया है और सूबे के कानून के माहिरों ने इन पेचीदगियों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया है।

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