Haryana

चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पशुपालकों ने बीमा कंपनी से पशु चोरी होने की स्थिति में भी बीमा क्लेम देने की मांग की

बैग न्यूज़ – झज्जर

ग्रामीण महेंद्रा बीमे की जानकारी देता हुआ।

जिले में पशु चोरी की रोकथाम कम होने की बजाय बढ़ने के बाद अब पशुपालक पशुधन बीमा में पशुओं की चोरी और लूट का क्लेम मांग कर रहे हैं। अभी तक बीमा कंपनियां चोरी और लूट के मामलों में क्लेम नहीं दे रही हैं। अब ऐसे मामलों में भी क्लेम दिए जाने की मांग उठ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में दुधारू पशुओं के बीमा योजना का लाभ लोग उठा रहे हैं। झाड़ली गांव के पशु मालिक राजबीर सिंह जाखड़ का कहना है कि दुधारू पशुओं को बिजली का करंट लग जाए, किसी जहरीले जानवर के काटने से मौत हो जाए तब ऐसे में पशु मालिक को काफी नुकसान हो जाता है।

आजकल एक भैंस एक लाख रुपए की आती है। दुधारू पशु मालिकों को आर्थिक नुकसान न हो तब इन मामलों में बीमा का पैसा मिल जाता है, लेकिन जब दुधारू भैंस ही कोई चुरा ले तब पशु पालकों को कोई क्लेम नहीं मिलता। ऐसे में सरकार को अब क्लेम में प्रावधान करना चाहिए। खानपुर खुर्द गांव निवासी महेंद्रा गहलावत का कहना है कि वो भैंस का बीमा हर साल कराता है, बस डर इस बात का रहता है कि वह चाेरी न हाे जाए। लिहाजा अब रात के समय दुधारू पशुओं का पहरा देना पड़ता है। गोरिया के राजकुमार का कहना है कि वो भी पशुओं का बीमा हर साल करवाता है। बीमारियों के कारण पशु की मौत हो जाती है। बीमा करा रखा हो तो नुकसान का पैसा मिल जाता है, ऐसे में अब चोरी का भी प्रावधान बीमे में होना चाहिए।

जिले भर में ढाई लाख पशुधन का बीमा हुआ

जिले की बात करें पांचों ब्लॉकों में ढाई लाख के करीब पशुधन हैं। इनमें सबसे ज्यादा दुधारू पशु हैं गाय और भैंस की संख्या अधिक है। अब इन पशुधन में से महज 4000 ही पशुधन का बीमा है। यह आंकड़ा भी तब संभव हो पाया है जब पशु पालन विभाग के अफसर पर फील्ड का स्टाफ सिलसिलेवार तरीके से पशुपालकों को पशु धन बीमा के प्रति जागरूक कर रहा है।

100 रुपए का बीमा होता है

पशु पालक हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित की गई पशु बीमा कंपनी से अपने पशुओं का बीमा करवा कर पूरा क्लेम ले सकता है। जिले में भी कई लाखों रुपए इस एवज में पशुपालकों को मिल चुके हैं। किसी भी कैटेगरी के पशुओं का बीमा महज 100 रुपए वार्षिक होता है। इससे पहले पशुपालन विभाग के एक्सपर्ट पशुधन की कीमत का आंकलन करते हैं। उदाहरण के लिए अगर मुर्रा भैंस की कीमत का आंकलन 80 हजार रुपए आंका गया है और भैंस का बीमा पशुपालक करता है और इसके बाद भैंस की कहीं बीमारी, प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य कोई दुर्घटना उसके साथ होती है तो 80 हजार का क्लेम पशुपालक को बीमा कंपनी देती है। इस तरह के कई केस में पशुपालकों को क्लेम मिला है। पशु अस्पताल खानपुर खुर्द के डाॅ. नरेन्द्र खटक का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्र में पशु बीमा के लिए घर घर जा रहे हैं। एससी कैटेगरी के पशु मालिक के लिए बीमा फीस फ्री है।

2019 में पशु बीमा के मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहा झज्जर

जिले के पशुपालन विभाग का स्टाफ भले ही इस बात को स्वीकार करता है कि जिले के पशुपालकों में पशु बीमा कराने के प्रति जागरूकता कम है। लेकिन यह स्थिति प्रदेश भर में ही मानी जा सकती है। इसका उदाहरण इस बात से मिल सकता है कि 2019 में जब रिव्यू हुआ तो प्रदेश भर में पशुधन बीमा कराने के मामले में महेंद्रगढ़ जिला अव्वल नंबर पर था और झज्जर दूसरे नंबर पर आया था। हालांकि अब 2020 में इस तरह की कोई रिव्यू कोविड-19 के कारण नहीं हो सकी है।

बंबुलिया गांव के पशुओं का सबसे ज्यादा बीमा

साल्हावास और मातनहेल क्षेत्र के गांव में पशुधन बीमा की जागरूकता की बात करें तब बंबूलिया गांव के लोग इस मामले में सबसे ज्यादा जागरूक हैं। यहां के पशुपालकों ने अपने 40 प्रतिशत पशुओं का बीमा कराया है। गांव गोरिया में दुधार पशुओं का बीमा 25 प्रतिशत हुआ है। खानपुर खुर्द गांव में पशु बीमा 20 प्रतिशत और झाड़ली गांव में 35 प्रतिशत हुआ है। अकेहड़ी मदनपुर गांव में पशु बीमा 20 प्रतिशत हुआ है।

जिले में पशुपालकों को अपने पशुधन का बीमा कराने के लिए अभी जागरूकता की कमी है। फिर भी हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं कि लोग अपने पशुओं का बीमा कराएं ताकि आपदा के समय उन्हें आर्थिक रूप से कोई परेशानी न हो। बीमा केस में पशुओं की चोरी की भी बात सामने आती है लेकिन इसका कोई प्रावधान नहीं है। ज्यादातर पशुओं की मौत बीमारी के कारण होती है। ऐसे में पशुपालकों को चाहिए कि वह आर्थिक हानि से बचने के लिए बीमा करवाएं। -डॉ. मनीष डबास, डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग

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