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जिस ट्रांसपोर्ट नगर का चौटाला ने 18 साल पहले और सुरजेवाला ने 6 साल पहले किया था शिलान्यास, वो आज तक नहीं बना

बैग न्यूज़ – कैथल

शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से कैथल के जिस ट्रांसपोर्ट नगर का तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने वर्ष 2002 में और उसके बाद कांग्रेस की सरकार के दौरान 2014 में सुरजेवाला ने शिलान्यास किया था, वह आज तक आबाद नहीं हो पाया है। इसके पीछे संबंधित विभाग व प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उस समय में शहर के दुकानदारों ने हुडा सेक्टर 25 में बनने वाले ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों के लिए प्लॉट तो खरीदे लेकिन हुडा की ओर से वहां कोई सुविधाएं न देने के कारण यह नगर विकसित नहीं हो सका।

विभाग ने दुकानों का निर्माण न करने पर तो पेनल्टी लगाना शुरू किया लेकिन सुविधाएं नहीं दी। अब हालात यह हैं कि प्लॉट धारकों में से करीब 200 लोगों ने अब सरेंडर कर दिया है और वे विभाग ने अपनी राशि वापस ले रहे हैं। इसके लिए अब भी विभाग कार्यालय में रोजाना एप्लीकेशन आ रही हैं। धारकों की मानें तो यहां पर बनाई गई करीब 17 दुकानों की कंप्लीशन की फाइल भी आज तक विभाग कार्यालय में अटकी हैं। ऐसे में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि ट्रांसपोर्ट नगर का सपना आखिकर सपना ही बनकर रह जाएगा।

2002 में तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला द्वारा लगाया गया ट्रांसपोर्ट नगर का शिलान्यास पत्थर

52.46 एकड़ जमीन पर बनना है ट्रांसपोर्ट नगर

शहर में ऑटो मार्केट, वाहनों की बॉडी मेकर दुकानें, रिपेयर व स्पेयर पार्ट्स की दुकानों के कारण हर समय जाम की स्थिति से निजात दिलाने के लिए सरकार की ओर से जींद रोड पर हुडा सेक्टर 25 में करीब 52.46 एकड़ जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाया गया था। यहां पर दुकानें, बूथ, ढाबे, होटल, जनरल बूथ, बॉडी बिल्डर स्टोरी, रिपेयर व स्पेयर पार्ट्स की दुकानें, बुकिंग एजेंसी कार्यालय आदि बनाए जाने प्रस्तावित किए गए। हुडा की ओर से 487 लोगों को दुकानों आदि के लिए प्लॉट बेचे गए। हुडा की ओर से छोटे व बड़े बूथों की जमीन 25,950 रुपए प्रति वर्ग गज रेट के हिसाब से अलॉट की है जो बाद में रेट और बढ़ाए गए। इसके बनने से शहर के जींद रोड रेलवे पुल के नीचे भीड़भाड़ वाली ऑटो, ट्रैक्टर मार्केट आदि को भी वहीं शिफ्ट करने का प्लान था।

2014 में शमशेर सिंह सुरजेवाला द्वारा लगाया गया ट्रांसपोर्ट नगर का शिलान्यास पत्थर

ले आउट प्लान रिवाइज में बढ़ाई थी सुविधाएं

ट्रांसपोर्ट नगर के रिवाइज्ड ले-आउट प्लान के तहत यहां पर रिपेयर/स्पेयर पार्ट्स शॉप डबल स्टोरी बेसमेंट 321, सिंगल स्टोरी बेसमेंट के 244 बूथ, बुकिंग एजेंसी 64 कार्यालय, ढाबे 6, होटल 2, बॉडी बिल्डर्स शॉप 15, जनरल बूथ 53, जनरल दुकानें 26, सर्विस स्टेशन 4 के अलावा एक-एक सीवरेज पंपिंग स्टेशन, पेट्रोल पंप, धर्मशाला, वेजब्रिज, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन, रिलीजियस बिल्डिंग, डिस्पेंसरी, वाटर वर्क्स, यूनियन आॅफिस व मल्टीपर्पज बूथ बनाया जाना प्रस्तावित है। दो बैंक शाखाएं व पांच टाॅयलेट/शुलभ शौचालय की सुविधा दी जानी शामिल की गई।

^ट्रांसपोर्ट नगर को विकसित कराने के लिए वे कमिश्नर से लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। हालात यह हैं कि सरकार के आदेश भी अधिकारी नहीं मान रहे। ऐसे में पब्लिक पिस रही है। कमिश्नर से मुलाकात के चार साल बाद यहां पर एक लाइट तक नहीं लग पाई है। यहां पर बनाई गई 17 दुकानें, जिन सबकी फाइलें कंप्लीशन की हुडा ऑफिस में लगी हैं। विभाग ने उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट दिया था जबकि लेटर ऑफ अलॉटमेंट नहीं दिया। बिना लेटर ऑफ अलॉटमेंट के वे मालिक नहीं बन सकते। जब हुडा को उसकी जमीन का सारा पैसा दिया गया है तो मालिकाना हक तो दुकानदार को मिलना ही चाहिए। सरकार व प्रशासन की लापरवाही के चलते 200 के करीब प्लॉट धारक सरेंडर कर चुके हैं। बाकी भी कर रहे हैं।
राजकुमार गर्ग, कैथल ट्रांसपोर्ट नगर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान

कैथल के ट्रांसपोर्ट नगर में अलॉट दुकानों के सरेंडर करने का मामला उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। हुडा की ओर से 487 लोगों को दुकानों आदि के लिए प्लॉट बेचे गए हैं। उच्चाधिकारियों के जैसे आदेश आएंगे, उनकी पालना की जाएगी।
जगदीश चंद्र, अधीक्षक, हुडा ऑफिस।

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