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सिगरेट नहीं पीने वालों को लंग कैंसर क्यों हो रहा है?

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सिगरेट नहीं पीने वालों को लंग कैंसर क्यों हो रहा है?

‘द प्रिंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉन स्मोकर्स में 30 से 40 प्रतिशत लंग कैंसर के केसेज़ बढ़े हैं.

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. बैग न्यूज आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

लंग कैंसर. यानी फेफड़ों में होने वाला कैंसर. अब जो मैं आपको बताते वाली हूं उसे सुनकर आपको झटका लगेगा. हिंदुस्तान में लंग कैंसर के केसेज़ लगातार बढ़ रहे हैं. डरावनी बात ये है कि लंग कैंसर उन लोगों में बढ़ रहा है जो सिगरेट नहीं पीते हैं. ‘द प्रिंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉन स्मोकर्स में लंग कैंसर के केसेज़ 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं.

Aiims Data

इस डेटा के मुताबिक, 2013 से 14 के बीच 940 केसेज़ थे. वहीं 2015-16 के बीच ये बढ़कर हो गए 2,082. ये आंकड़े AIIMS ने दिए हैं. तो आज बात करते हैं लंग कैंसर के बारे में. पहले समझते हैं लंग कैंसर क्या होता और क्यों होता है?

क्या होता है लंग कैंसर?

ये जानने के लिए हमने बात की डॉक्टर विभोर से. उन्होंने बताया,

लंग कैंसर में फेफड़ों में गांठ बन जाती है जो फेफड़ों के आसपास के टिश्यू को डिस्ट्रॉय करने लगती है, उसमें से छोटे-छोटे सेल्स टूटकर पूरे शरीर में फैलते हैं. कभी ब्रेन, कभी लिवर या कभी बोन्स में इस तरह की गांठ को लंग कैंसर कहते हैं.

डॉक्टर विभोर महेंद्रू, कैंसर स्पेशलिस्ट, सहारा हॉस्पिटल, लखनऊ
डॉक्टर विभोर महेंद्रू, कैंसर स्पेशलिस्ट, सहारा हॉस्पिटल, लखनऊ

कारण:

-लंग कैंसर की सबसे बड़ी वजह है स्मोकिंग

-इसमें एक्टिव और पैसिव दोनों तरह की स्मोकिंग शामिल है

-जो स्मोक कर रहा है वो तो रिस्क पर है ही. उसके आसपास वाले भी रिस्क पर है

-पैसिव स्मोकिंग ज़्यादा ख़तरनाक है. क्योंकि आजकल सारी सिगरेट में फ़िल्टर होता है. फ़िल्टर से काफ़ी चीज़ें रुक जाती हैं. फेफड़ों तक नहीं जाती हैं. पर जो बगल में बैठा है. उसके अंदर भी धुआं जा रहा है. वो काफ़ी ख़तरनाक है

-निकल इंडस्ट्री में काम करने वालों को भी रिस्क होता है. वो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में निकल सांस में लेते हैं जो आगे जाकर कैंसर में तब्दील हो सकता है

Small Cell Lung Cancer: How to Improve Survival Rates
लंग कैंसर में फेफड़ों में गांठ बन जाती है जो फेफड़ों के आसपास के टिश्यू को डिस्ट्रॉय करने लगती है

-जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं

लंग कैंसर क्या होता और क्यों होता है, ये तो पता चल गया. अब जानते हैं कि कैसे पता चलेगा लंग कैंसर है. क्या फ़िल्मों की तरह हर केस में खून की उल्टी होती है? या कोई और भी लक्षण हैं? और सबसे ज़रूरी बात. इसका इलाज क्या है?

लक्षण:

-खांसी, खांसी में खून भी आ सकता है

-छाती में दर्द होता है

-बाकी शरीर में बीमारी फैलती है तो उसके लक्षण आ सकते हैं

-ब्रेन में फैलती है तो सिरदर्द हो सकता है. दौरा भी पड़ सकता है

-हड्डियों तक जाती है तो हड्डियों में दर्द होता है. फ्रैक्चर भी हो सकता है

-लंग्स में बीमारी बढ़ जाती है तो चेहरे पर सूजन भी आ जाती है

Herpes offers big insights on coughing – and potential new remedies - UQ News - The University of Queensland, Australia
लंग कैंसर के लक्षण कई बार टीबी की तरह भी दिखते हैं

-इसलिए पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि लंग कैंसर है या टीबी है

-बहुत लोगों का लंबे समय तक टीबी का इलाज चलता रहता है. जब बीमारी बढ़ जाती है तब पता चलता है कि लंग कैंसर है

-अगर लक्षण लंबे समय तक चले जा रहे हैं और दवाइयों से भी असर नहीं दिख रहा है दो-तीन हफ़्तों तक, तब डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाएं

इलाज:

-लंग कैंसर का इलाज उसके स्टेज पर निर्भर करता है, मतलब  इस बात पर कि बीमारी कितनी फैली हुई है

-शुरुआती बीमारी होती है पहला या दूसरा स्टेज. इसमें बीमारी लंग्स तक ही सीमित होती है और आगे नहीं फैली हुई होती है ऐसे केस में पहला स्टेप होता है सर्जरी

-सर्जरी में कभी एक हिस्सा, या कभी पूरा लंग भी निकालना पड़ता है, साथ ही बीच में जो लिम्फ़ नोड्स होते हैं वो भी निकाले जाते हैं. लिम्फ़ नोड्स को जांच के लिए भेजा जाता है. जांच की रिपोर्ट के बाद तय होता है कि सर्जरी के बाद कीमोथैरेपी या रेडियोथैरेपी की ज़रूरत है या नहीं है

-जब बीमारी तीसरे स्टेज तक पहुंच जाती है तो इसमें इलाज के दो भाग होते हैं. पहले पार्ट में हम दवाइयों की मदद से बीमारी को सिकोड़ते हैं. उसके बाद ऑपरेशन किया जाता है

-दूसरे भाग में जहां बीमारी और थोड़ी ज़्यादा बढ़ी हुई होती है तो उसमें ऑपरेशन नहीं होता. उसमें सिर्फ़ रेडियोथैरेपी या कीमोथैरेपी से ही उसका पूरा इलाज होता है

डॉक्टर साहब ने जो बाते बताईं उनपर ज़रूर ध्यान दें.

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