Haryana

जिस पंजाब से अलग हो खुद की पहचान के लिए लड़ा हरियाणा, अब उसी को पछाड़ा; धान की उपज 7 गुना और गेहूं की उपज साढ़े 3 गुना तक बढ़ी

बैग न्यूज़ – पानीपत

फाइल फोटो।

पंजाब से अलग होकर हरियाणा नया राज्य बना तो खुद की पहचान का मोहताज था, लेकिन अपने जज्बे और जुझारूपन से हर कदम पर खुद को साबित किया और अब प्रगति में पंजाब से भी आगे निकल गया है। चुनौतियों भरे सफर की शुरुआत एक नवंबर 1966 में हुई तब राज्य की ज्यादातर भूमि बंजर थी, लेकिन किसानों ने मेहनत करके उपजाऊ बनाया। तब से अब तक धान की उपज 7 गुना बढ़ी है, जबकि गेहूं की उपज साढ़े 3 गुना बढ़ी है।

अब बागवानी और सब्जियों में भी पंजाब से काफी आगे हैं। विकास का सबसे बड़ा टर्न 1971 से 73 के बीच में आया। इस दौर में नहरों से नदियों का पानी एक-जगह से दूसरी जगह तक भेजा गया। 1985 से 90 में महसूस हुआ कि केवल खेती से विकास संभव नहीं है। फिर इंडस्ट्री की तरफ रुख किया। 1985 के आसपास पानीपत में टेक्सटाइल इंडस्ट्री व गुरुग्राम-फरीदाबाद में ऑटोमोबाइल सेक्टर की शुरुआत हुई। इसके बाद फिर रफ्तार कम नहीं होने दी।

ऐसे निकले पंजाब से आगे

एग्रीकल्चर में 4% की दर से ग्रोथ

  • 1966 में पंजाब के पास करीब 52 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में करीब 35 लाख हेक्टेयर में खेती योग्य जमीन थी, लेकिन हरियाणा में करीब 40% जमीन पर सिंचाई के साधन थे। इसलिए केवल 15 लाख हेक्टेयर पर ही ज्यादा फसलें होती थी।
  • हरियाणा ने कमजोरी को ताकत में बदला और नहरों का जाल बिछाया, फिर ट्यूबवेल आदि से सिंचाई की उपलब्धता तय की। अब 30 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन ऐसी है, जिस पर दो या दो से फसलें हो रही है।
  • 1966 में राज्य में 7 लाख 43 हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा था। प्रति हेक्टेयर उत्पादन करीब 15 क्विंटल था। लेकिन अब यह रकबा 25 लाख हेक्टेयर को पार कर गया और प्रति हेक्टेयर उत्पदान 48 क्विंटल तक पहुंच गया है।
  • 1966 में 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर धान का रकबा था, जो अब बढ़कर 13 लाख हेक्टेयर हो गया है।
  • 1966 में कपास का रकबा 1 लाख 80 हजार हेक्टेयर था, जो अब 7 लाख हेक्टेयर के पार है। देश में 5वां स्थान है।
  • यहां खेतों का औसत आकार 2.25 हेक्टेयर है, जबकि देश का 1.16 हेक्टेयर है। हरियाणा को ‘अन्न-पात्र’ कहा जाता है।
  • प्रदेश में कृषि करीब 4% की दर से ग्रोथ कर रही है। वहीं दूध उत्पदान में पंजाब के करीब पहुंच गया है। हरियाणा के किसान भी आधुनिक होते जा रहे हैं। कृषि में इंडस्ट्री और आईटी सेक्टर की इंट्री हो रही है।

दूसरे देशों में हाथ से बने सामान की मांग ज्यादा

पानीपत में होम फर्निशिंग आइटम, कंबल प्लांट, चद्दर प्लांट, 3डी बेडशीट प्लांट, धागे बनाने की स्पिनिंग मिल, कपड़ों को रिसाइकिल कर धागा बनाने के प्लांट, कारपेट आदि का काम होता है। यहां सारा काम हाथ से और चरखे व खड्डियों से होता है। इसकी डिमांड अमेरिका व यूरोप के देशों में है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 1984-85 तक पानीपत में 384 औद्योगिक यूनिट रजिस्टर्ड थीं, जिसमें 7.66 करोड़ रुपए का इनवेस्ट था। अब 12 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट और 90 हजार करोड़ का डोमेस्टिक मार्केट है। 1990 के बाद टेक्सटाइल इंडस्ट्री में ग्रोथ शुरू हुआ। अब मिंक व पोलर कंबल के 60 प्लांट और 45 से अधिक स्पिनिंग मिल हैं।

अब तक ओलिंपिक में देश को दिलाए नौ पदक

हरियाणावी कुश्ती-कबड्डी तक सीमित थे। 2010 के बाद अन्य खेलों में भी रुझान बढ़ा, क्योंकि देश को कामनवेल्थ की मेजबानी मिली थी। 17वें एशियाई खेलों हरियाणा के खिलाड़ियों ने 18 पदक हासिल किए थे। ओलिंपिक में देशभर से एक करोड़ की आबादी पर एक खिलाड़ी होता है जबकि हरियाणा से औसतन तीन खिलाड़ी भाग लेते हैं। हरियाणा 21918 अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी दे चुका है। 106 अर्जुन अवार्डी, द्रोणाचार्य अवार्डी और ध्यानचंद अवार्डी दिए हैं। देश को हरियाणा ने अब तक 9 ओलिंपिक, 80 एशियन और 83 कॉमनवेल्थ पदक दिलवाए हैं।

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